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समीर : हमने कुछ बाक़ी रखा है सुहाग रात के लिए

मैं: ओह हो। क्या मैं शाहनाईयाँ सुन रहा हूँ शादी की?

समीर: हाँ, हमने शादी का फ़ैसला कर लिया है आशा है कि माताज़ी और पिताजी मंज़ूर दे देंगे। मैं माताज़ी से पूछ लूंगा। इस वक़्त पूर्वी धीरे से बोली: भैया, साथ साथ हमारी भी पूछ लेना। दो मिनट के लिए सन्नाटा छा गया।

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